<h3 style="text-align: justify;">पूर्व स्थिति</h3> <p style="text-align: justify;">महमनिया देवी एवं हीरा उराँव, पिता-बया उराँव, घाघरा प्रखंड के आदर पंचायत के घुट्टी गाँव के निवासी हैं। इनका परिवार, आस-पास के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। वर्तमान में इनका मुख्य पेशा खेती-बारी है। बीस (20) साल तक इनका परिवार, उत्तर प्रदेश के ईट भट्टों में अपना भविष्य ढूंढता रहा पर हाथ लगी सिर्फ निराशा स रोजमर्रे का न्यूनतम खर्चा छोड़ कुछ भी ना निकल पाया। पारंपरिक तरीके से खेती करके इनका परिवार बमुश्किल 6 माह का अनाज उपजा पाता था।</p> <h3 style="text-align: justify;">पहला स्वयं सहायता समूह</h3> <p style="text-align: justify;">२० दिसंबर २००२ की सुबह इनके जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आई। किसी ने यह सोचा ना था कि एक छोटा सा कदम सभी गाँव वालों के जीवन में मील का पत्थर साबित होगा। इसी दिन घुट्टी गाँव में पहले स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ था। स्वयं सेवी संस्था, प्रदान ने समूह गठन करते ही रबी एवं गरमा फसल का प्रशिक्षण दिया जिसमे हीरा उराँव ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। प्रशिक्षण उपरांत इन्होंने गरमा सब्जी लगाने की तैयारी की एवं 15000 रुपये तक आमदनी की। प्रोत्साहित होकर इन्होंने उसी वर्ष खरीफ, रबी फसल करने की योजना बनाई |</p> <h3 style="text-align: justify;">SRI (श्री विधि) तकनीक</h3> <p style="text-align: justify;">SRI (श्री विधि) तकनीक से धान की खेती एवं उन्नत तरीके से नकदी फसल जैसे टमाटर, मिर्चा, फूलगोभी, पत्ता गोभी, मटर इत्यादि का उत्पादन किया। जिन खेतों से हिरा उराँव के परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो रहा था उसी खेत से धान का उपज 4 गुणा बढ़ गया एवं नकदी फसल से गरमा, खरीफ, रबी, मिलाकर 70000 रुपये तक का आमदनी किया।</p> <h3 style="text-align: justify;">राष्ट्रीय सम विकास योजना - लिफ्ट मशीन</h3> <p style="text-align: justify;">ये तो शुरुआती दौर था असल बदलाव तो वर्ष 2004 से शुरू हुआ। गाँव के 70 प्रतिशत परिवार स्वयं सहायता समूह से जुड़ चुके थे। राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत गाँव में लिफ्ट मशीन लगायी गयी जो गाँव वालो के लिए वरदान साबित हुई। हीरा ने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया। उन्होंने नकदी फसल के लिए जहां अपनी जमीन का विस्तार किया साथ ही साथ रबी में गेहू का फसल 3 गुना ज्यादा जमीन में लगायी।</p> <h3 style="text-align: justify;">जहाँ बाह, वही राह</h3> <p style="text-align: justify;">अब तक होरा एवं महमनिया देवी का परिवार खाद्यान के मामले में सुरक्षित हो चुका था। अब बात श्री अतिरिक्त आमदनी की जिससे इनका परिवार जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परेलू सह-सविधाओं की पूर्ति कर सके। वो कहते है ना 'जहाँ बाह, वही राह । वर्ष 2007 में प्रदान द्वारा TWC-MESO परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आम बागवानी लगाने का मौका मिला। इस परियोजना का भी हीरा ने भरपूर फायदा उठाया। जहां गांव के अन्या परिवार आम पौधा लगाने में कतरा रहा थे वही होरा ने 100 पेड़ लगाने का निर्णय लिया |</p> <h3 style="text-align: justify;">आम के बगान</h3> <p style="text-align: justify;">इनको देखकर गाँव केऔर 22 परिवारों में पेड़ लगाने का साहस किया, और देखते ही देखते गाँव में 17 एकड़ का आम बगान तैयार हो गया। तत्पश्चात स्पेशल SGSY प्रोजेक्ट आया जिसमें हीरा की अगुवाई में घुटी गांव में आम बागवानी सिंचाई के लिए सीपेज टंक 5 प्रतिशत मॉडल, 3040 मॉडल, लिपट मशीन, कुओं का निर्माण किया गया। इस परियोजना से स्वयं सहायता समूह से जुड़े 40 परिवार प्रत्यक्ष रूप से एवं 20 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="250" height="170" /></p> <h3 style="text-align: justify;"> गाँव वालों के लिए मार्गदर्शक-हीरा</h3> <p style="text-align: justify;">हीरा सदैव ही अपने गाँव वालों के लिए मार्गदर्शक साबित हुए। गाँव के 40 परिवारों ने कुल मिलाकर 32 एकड़ जमीन पर आम बागवानी लगा तो लिया पर उसकी देख-भाल में सजगता नहीं दिखाई। जब हीरा ने अपने प्लाटगेआम पेड़ के देख-रेख में प्रशिक्षण अनुरूप अपना पसीना बहाया।उसका असर पौधों के विकास में साफ दिखाई दिया। देखा देखी गांव के सभी लोगों ने भी आम बागवानी की देखभाल शुरू की।</p> <h3 style="text-align: justify;">कमाई का नया अनुभव</h3> <p style="text-align: justify;">वर्ष 2008 से आम का उत्पादन शुरू हो गया। पहले साल ही होते ने आम से 34000 रुपये की आमदनी की। इससे प्रोत्साहित होकर हीरा ने और मेहनत किया और अगले वर्ष 2010 में 45000 रुपये की आमदनी की। जैसे-जैसे आम के पेड़, बड़े और परिपक्व होते गए आमदनी में इजाफा होता गया। वर्ष 2015 महीरा ने सिर्फ आम बेचकर सुख 1,20,000 रुपये तक की कमाई की। किन्तु वर्ष 2016 होत के लिए अच्छा नहीं गुजरा।ओला गुष्टि के कारण आम एवं गेहू की फसल में भारी क्षति हुई । इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते है की हीरा 1.20,000 से 8,000 रुपये की कमाई में पहुँच गए। पिछले सात (7) साल के अनुभव अनुसार हीरा को आशा है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो आने वाले आम के सीजन में रिकॉर्ड कमाई करेंगे। लगभग 1.5-2 लाख रुपये तक। हीरा ने अभी से ही आम के पेड़ों की देखभाल शुरू कर दी।</p> <h3 style="text-align: justify;">शिक्षा के साथ सुख-सुविधाएँ</h3> <p style="text-align: justify;">आज के दिन में महमनिया देवी एवं हीरा उराँव सभी दृष्टिकोण से सुखी हैं। उन्होंने सुख-सुविधा के सारे साधन जुन लिए है। पानी बग्यो के विभाग के लिए अलग-अलग विस्तर एवं चौकी, सबके पास अपनी साइकिल. घर में टेलीविजन.3 मोबाइल.2 पंप सिवाई के लिए. 1 पॉवरटिलर। सभी बच्चों को पढाई-लिखाई प्राइवेट स्कूल में हो रही है। बड़ा बेटा बी.ए. करके हिमाचल में नौकरी करता है। और महिने में 13-15 हजार रुपये आसानी से कमा लेता है। दूसरा बेटा बी.ए. कर रहा है. साथ में कम्प्यूटर भी सीख रहा है।तीसरा बेटा को पढ़ाई में मन नहीं लगा तो वो मेट्रिक करके कमाने मला गया, पौधा बेटा प्रवी का में है एवं सबसे छोटी उनकी बेटी का कसा है। इन सबसे ऊपर हीरा का आरम विश्वास है जो किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।</p> <h3 style="text-align: justify;">महिला मंडल काे श्रेय</h3> <p style="text-align: justify;">हीरा से जब ये पूछा गया कि उपरोक्त सभी बातों को देखते हुए आपको सबसे ज्यादा खुशी किस बात की है. उन्होंने बताया- मेरे परिवार के अन्दर का माहौन, हमारा एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सबकी इच्छा का पूरा होना, एवं सबको मिलकर निर्णय लेना ये सब छोटी पर महत्वपूर्ण बातें हैं, जो मेरे घर को, मेरे परिवार को, गाँव के अन्य घरों से अलग करती हैं। इन सबका श्रेय में महिला मंडल को देना चाहता हूँ जिसके बिना ये सब असंभव होता।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="230" height="170" /></p> <h3 style="text-align: justify;">बदलाव के सिपाहियों को सलाम</h3> <p style="text-align: justify;">महमनिया देवी एवं हीरा उराँव से प्रेरित होकर आस-पास के गांव के सैकड़ों परिवार अपने बदलाय की कहानी महिला मंडल से जुड़कर लिख रहे है एवं आदर्श गाँय आदर्श पंचायत, आदर्श झारखण्ड की कल्पना को साकार कर रहे हैं। इन सब बदलाव के सिपाहियों को सलाम।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : गुमला जिला प्रशासन, गुमला, झारखंड।</p>