<h3 style="text-align: justify;">महिला समूह का गठन</h3> <p style="text-align: justify;">सेलेया, गुमला जिला के रायडीस प्रवन के परसा माया का एक गाँव है। इस गांव में कुल 80 परिवार रहते है। इस गाँव में मुख्यत आदिवासी (जरीब) एवं कुछ हिन्दू परिवार रहते हैं। पहाड़ की गोद में बसा हुजा यह गाँव गुमला जिला कार्यालय से 11 कि.मी. एवं रावती प्रबंब कार्यालय से कि.मी. की दूरी पर स्थित है। साल 2000 में प्रदान संस्था ने इस गाँव महिला समूह का गठन कर ग्रामीणों को संगठित करना प्रारम्भ किया था। आज इस गांव में कुल महिला समूह सफलता से चल रहे। महिला मंडल गठन के बाब समूहों को प्रदान संस्था के द्वारा लगातार कृषि सचित प्रशिक्षण मिलता रहा। साथ ही साथ इस गांव में आदिवासी कल्याण विभाग के माध्यम से सिंचाई को साधन, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना से भागवानी निर्माण जमीन समतलीकरण इत्यादि कार्य सरकार द्वारा प्रदान की तकनीकी सहायता से संपन्न किया गया।</p> <h3 style="text-align: justify;">पेयजल एवं स्वच्छता </h3> <p style="text-align: justify;">खेतीबारी में इस प्रकार प्रगति से किसान आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने किन्तु स्वास्थ्य, शिक्षा में गांव की स्थिति में बदलाव बहुत ज्यादा नहीं हुआ था। इस कारण प्रदान संस्था ने आजीविका के साथ-साथ अन्य विभिन्न विकास के मुददे पर भी लोगों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया। इस प्रयास में लाेगाें ने पेयजल एवं स्वच्छता के कार्य को अधिक प्राथमिकता दी। पेयजल एवं स्वच्छता में तेलेया के ग्राम वासियाें को जागरूक करने के लिए प्रदान संस्थान ने ग्राम विकास संस्था के साथ इकरारनामा बनाया और तेलेया गांव के लोगों को जागरूक करने की काेशिश की।इस जागरूकता कार्यक्रम में महिला विकास मंडल रायडीह (त्रिस्तरीय स्वयं सहायता समूहाें का प्रखंड स्तरीय संगठन जो NRLM का कार्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रही है।) ने अहम भूमिका निभायी। कार्यक्रम के समय पता चला कि तेलेया गाँव एक निर्मल गांव होने के बावजूद कि इस गाँव में किसी भी परिवार के पास शौचालय नहीं था।</p> <table style="border-collapse: collapse; width: 100%;" border="1"> <tbody> <tr> <td style="width: 100%; text-align: justify;">निर्मल भारत अभियान के माध्यम से बना कोई भी शौचालय इस्तेमाल करने के योग्य नहीं था. इस कारण कोई भी शौचालय कभी भी व्यवहार में नहीं लाया गया था। ग्रामीणों ने मिलकर इस बात को महिला विकास मंडल, रायडीह के माध्यम से माननीय उपायुक्त तक पहुंचाया। उनसे सलाह मिली कि माननीय विधायक इस कार्य को फिर से करने में मदद कर सकते हैं।</td> </tr> </tbody> </table> <h3 style="text-align: justify;">शाैचालय का निर्माण</h3> <p style="text-align: justify;">ग्रामीणों ने तय किया कि माननीय विधायक से सहायता राशि मांग करने के पहले अपने अंशदान प्रदान एवं ग्राम विकास की तकनीकी सहायता से सर्वप्रथम शौचालय निर्माण का कार्य शुरू करेंगे एवं छत तक (Roof Level ईट जोड़ाई पूर्ण करेंगे। इस कार्य को करने के लिए लोगों के पास कोई भी राशि उपलक्ष नहीं थी। लोगों ने तय किया कि गांव के लोग आपस में मिलकर खुद ईट बनायेंगे, पत्थर, बालू, ढाेका इत्यादि खुद से जुगाड़ करेंगे। लोगों ने यह भी तय किया कि शौचालय साया साथ अपना स्नानघर भी बनायेंगे। इसी सोच के साथ सभी मंडलों ने संगठित तरीके से अपने गाँव में भट्टा लगाया, ईटा पकाई बालू पत्थर, चिप्स, ढाेका आदि का जुगाड़ किया। ग्राम विकास संस्था ने गांव के जोड़ाई का प्रशिक्षण भी दिया। एक-दो महिना लोगों ने अपने-अपने शौचालय एवं स्नानघर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। छत तक जोड़ाई होने के बाद ग्रामीणों ने माननीय विधायक को गाँव में निमंत्रण दिया तथा अपने सपने एवं समस्याओं को माननीय विधायक के सामने रखा। पूरे देश में जब 'स्वच्छ भारत का नारा चाराें दिशा में गूंज रहा था, तब तेलेया गाँव के ग्रामीणों के इस प्रयास मे माननीय विधायक को काफी खुशी पहुंचाई। तेलेया गाँव के प्रयासाें को आगे बढ़ाते हुए माननीय विधायक ने प्रति परिवार दस हजार रुपया शाैचालय एवं स्नानघर निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि प्रदान की। इस राशि के सहयोग से ग्रामीणों ने अपना अपना शौचालय एवं स्नानघर का कार्य पूरा किया।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="204" height="179" /></p> <h3 style="text-align: justify;"> पानी की टंकी </h3> <p style="text-align: justify;">आज की तारीख में तेलेया गाँव के सभी 80 परिवार के पास अपना-अपना शाैचालय एवं स्नानघर है एवं सभी परिवार इसे इस्तेमाल भी कर रहे है। साथ ही साथ सभी ग्रामीणों में मिलकर इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक समिति (तेलेया पेयजल एवं सफाई समिति) का गठन किया तथा प्रतिव्यक्ति एक हजार रुपया इस सोच के साथ जमा किया (एक मुस्त या किस्त में) कि यह राशि भविष्य में मरम्मत के काम आयेगी। यानी ग्रामीणी की अगली सोच कि इस सके बाद गाँव पेयजल के लिए पानी की टंकी बनायेंगे। इस कार्य को सम्पन्न करने हेतु ग्रामीणों ने प्रदान एवं ग्राम विकास की मदद से सम्पूर्ण कार्य योजना बनायी है एवं इस योजना के साथ पेयजल-स्वच्छता विभाग से राशि की मांग करने पर विचार कर रहे हैं। इस तरह तेलेया ग्राम आजीविका के साथ साथ स्वच्छता तथा स्वास्थ्य में भी आगे बन रहा है।</p>