<h3 style="text-align: justify;">लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत</h3> <p style="text-align: justify;">घसनी उराँव एवं उनके जीवन थी येल उराँव, गुमला प्रखंड के फोरी पंचायत के छोटा पसंगा नामक गाँव के निवासी हैं। इनका परिवार आस-पास के क्षेत्र के । लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। वर्तमान में इनका मुख्य पेशा आम बागबानी और खेती-बारी है। सोलह साल पहले इनका परिवार गुमला जिला में कई ईट भट्टों में अपना भविष्य ढूंढ़ता रहता था। कभी पंजाब जाकर मजदूरी करके कमा रहे थे। रोजमर्रा का न्यूनतम खर्च छोड़ कर कुछ भी नहीं बचता था। पारंपरिक तरीके से खेती करके इनका परिवार बामुश्किल 6 माह का अनाज उपजा पाता था। </p> <h3 style="text-align: justify;">प्रशिक्षण से बदलाव</h3> <p style="text-align: justify;">वर्ष 2006 में प्रदान संस्था के सहयोग से गाँव में । महिला की वर्तमान स्थिति एकता और आपसी सहयोग के बारे में चर्चा की गई । इसके बाद इस गाँव में सबसे पहले चाला स्वयं सहायता समूह का निर्माण हुआ | घसनी दीदी ने समह की ओर से लेखा-बड़ी का कार्य शुरू किया। स्वयंसेवी संस्था प्रदान ने समूह गठन करते ही खरीफ धान एवं नकदी फसल का प्रशिक्षण दिया जिसमें घसनी उराँव ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशिक्षण उपरान्त इन्होंने खरीफ, सब्जी लगाने की तैयारी की एवं 25000 रुपये की आमदनी की। प्रोत्साहित होकर इन्होंने उसी वर्ष गरमा, रबी फसल उगाने की योजना बनायी। SRI (श्री विधि) तकनीक से धान की खेती एवं उन्नत तरीके से नकदी फसल जैसे टमाटर, मिर्चा, फूलगोभी, पत्ता गोभी, मटर इत्यादि का उत्पादन किया। जिस खेत से घसनी उराँव के परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो रहा था उसी खेती से धान की उपज 5 गुना बढ़ गयी एवं आज के दिन नकदी फसल से गरमा, खरीफ, रबी, मिलाकर 90000 रुपये तक की आमदनी की ।</p> <h3 style="text-align: justify;">असल बदलाव</h3> <p style="text-align: justify;">यह तो शुरुआती दौर था। असल बदलाव वर्ष 2007 से शुरू हुआ। पूरे गाँव के 90 प्रतिशत परिवार स्वयं सहायता समूह से जुड़ चुके थे। तभी विशेष स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत प्रदान संस्था ने एक टोलासभा बनाने की बात गाँवमें रखी । तब घसनी दीदी ने अगुआई करते हुए टोला सभा बनाया, टोला सभा से 18 परिवार का धान की जमीन के आसपास 5 प्रतिशत मॉडल बनाकर घसनी दीदी 5 प्रतिशत मॉडल से अपने धान की उपज बरसात न होने पर भी सुरक्षित कर ली |</p> <h3 style="text-align: justify;">उपज में बदलाव-आम की बागवानी</h3> <p style="text-align: justify;">घसनी दीदी ने जमीन समतलीकरण, केचुआ टैंक आदि का निर्माण कर अपनी कृषि उपज को बढ़ाया। अब तक घसनी का परिवार खाद्यान के मामले में सुरक्षित हो चुका था और बरसाती, रबि, गरमा में सब्जी उगा कर अच्छी इन्कम कर रहा था। अब बात थी अतिरिक्त आमदनी की जिससे जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू सुख-सुविधाओं की पूर्ति हो सके। वर्ष 2007 में SGSY परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आम बागवानी लगाने का मौका मिला, उस परियोजना से घसनी ने भरपूर फायदा उठाया। जहां गाँव के अन्य परिवार आम पौधा लगाने में कतरा रहे थे वहीं घसनी दीदी ने 125 पेड़ लगाने का निर्णय लिया, इनको देखकर गाँव के सभी परिवारों ने पेड़ लगाने का साहस किया। आम बागवानी के साथ-साथ सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद घसनी दीदी 1 एकड़ टांड जमीन में बरसाती और रबि सब्जी उगाकर 50000 रुपया तक प्रत्येक साल कमाई कर रही हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="241" height="148" /></p> <p style="text-align: justify;">वर्ष 2010 से आम उत्पादन शुरू हो गया है। पहले साल ही घसनी ने आम से 26000 रुपये की आमदनी की, इससे प्रोत्साहित होकर घसनी ने और मेहनत करते हुए अगले वर्ष 2011 में 65000 रुपये की आमदनी की, जैसे-जैसे आम के पेड़, बड़े और परिपक्व होते गए, आमदनी में इजाफा होता गया। वर्ष 2016 में सिर्फ आम बेचकर शुद्ध 75,000 रुपये तक की कमाई की। </p> <h3 style="text-align: justify;">सक्षमता की ओर</h3> <p style="text-align: justify;">आज के दिन घसनी उराँव एवं जुयेल उराँव सभी दृष्टिकोण से सुखी हैं। उन्होंने सुख-सुविधा संबंधी सभी साधन हासिल कर लिये हैं। घसनी दीदी अपने बच्चों को डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ा रही हैं। इन सबसे घसनी का आत्म विश्वास किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="260" height="160" /></p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : गुमला जिला प्रशासन, गुमला, झारखंड।</p>